वर्तुल गति किसे कहते है, वर्तुल गति की परिभाषा, उदाहरण, वर्तुल गति और दोलन गति में अंतर

 इस Article में हम वर्तुल गति (circular motion in Hindi ) के बारे में पढ़ेंगे। इसमें पढ़ेंगे वर्तुल गति किसे कहते है ?, (What is circular motion in Hindi)  वर्तुल गति की परिभाषा, एक समान वर्तुल गति किसे कहते है ?, वर्तुल गति और दोलन गति में अंतर।  यदि आपको ये सब पढ़ना है, तो नीचे पढ़ सकते है।

 

वर्तुल गति किसे कहते है, वर्तुल गति की परिभाषा, उदाहरण, वर्तुल गति और दोलन गति में अंतर

वर्तुल गति किसे कहते है?

वर्तुल गति या फिर वृत्तिय गति किसी भी वृर्ताकार पथ पर होने वाली गति को कहते है।

यदि हम वृत्तिय गति के उदाहरण देखे तो सूर्य के चारो ओर पृथ्वी की गति या फिर कोई वृर्ताकार पथ पर ट्रेन खिलोने की गति आदि होते है।

वर्तुल गति की परिभाषा 

जब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार मार्ग पर गति करती है तो इसे वस्तु की वृत्तीय गति कहा जाता है। 

जो वस्तु वृत्तीय गति करती है, उस वस्तु पर एक बल केंद्र की ओर लगता है।  जिसे अभिकेंद्र बल कहा जाता है।  इस तरह जो वस्तु वृत्तीय पथ पर गति करती है। प्रत्येक वस्तु को अभिकेंद्र बल की आवश्यकता होती है। 

वर्तुल गति / वृत्तीय गति के उदाहरण

1. डोरी से बधे पिंड को वृत्तीय गति करने के लिए अभिकेंद्र बल डोरी के तनाव से प्राप्त होता है। 

2. सभी गृह और पृथ्वी सूर्य के चारो ओर वृत्तीय गति करते है , जिसे अभिकेंद्र बल गुरुत्वाकर्षण बल से प्राप्त होता है। 

एकसमान वृत्तिय गति किसे कहते है ?

यदि कोई वस्तु एक निश्चित बिंदु को केंद्र मानकर एकसमान चाल से वृत्तिय गति करती है तो इसे एकसमान वृत्तिय गति कहते है।

वर्तुल गति के उदाहरण देखे तो पता लगता है की यदि कोई कण एक ही जगह पर वर्तुल घूमता रहता है जबकि कण गोले के आकार में नहीं घूमता जैसे की जो धरती है वह सूर्य के चारो ओर चक्कर लगाती है ये एक प्रकार की वर्तुल गति ही होती है क्योंकि जब पृथ्वी सूर्य के चक्कर लगाती है तो एक गोला बनाती यह जो गति है जो यहां हो रही है वह ही वृत्तिय गति है।

यदि कोई कण एकसमान गति से वृत्तिय गति करता है तो उसके वेग में भी निरंतर परिवर्तन होता है तथा इस परिवर्तन के कारण त्वरण पैदा होता है जिसे अभिकेंद्र त्वरण कहते है। इसको अभिकेंद्र त्वरण इसलिए कहते है क्योंकि ये त्वरण वृत के केंद्र की ओर होता है।

किसी वृत पर गति कर रहे कण का कोणीय वेग ω है।

अतः इससे निम्न सूत्र प्राप्त होता है।
ω= dθ/dt

यहां पर dθ कोणीय विस्थापन को प्रदर्शित करता हैं 
dt समय को दर्शाता हैं।

अब वृत्तिय गति कर रहे कण के कोणीय त्वरण को α से प्रदर्शित करते है।
α से कोणीय त्वरण को दर्शाते है

अतः 

कोणीय त्वरण α= dω/dt
यहां dω कोणीय वेग को प्रदर्शित करता है।
तथा dt समय को प्रदर्शित करता हैं।

दोलन गति किसे कहते है?

जब कोई बच्चा झूला झूलता है तो वह अपनी स्थती से आगे तथा पीछे गति करता है तथा इस प्रकार की गति को दोलन गति कहते है।

लेकिन यदि कोई कण एकसमान आवर्ती गति करता है तो इस प्रकार की गति वृत्तिय गति होती है ना की दोलन गति क्योंकि इस गति में पिंड आगे पीछे गति ना करके एकसमान गति करता है।

वर्तुल गति तथा दोलन गति में क्या अंतर है?

दोलन एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमे लगातार गति को आगे पीछे दोहराया जाता हैजबकि वर्तुल गति में कोई भी कण एक ही दिशा में आगे बढ़ता है।वृर्ताकार पथ पर जो गति होती है उसे वर्तुल गति कहते है।


Post a Comment

0 Comments