संधारित्र तथा समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता

इस 12th Physics in Hindi Tutorial में संधारित्र तथा समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता के बारे में पढ़ेंगे। 

 हम पहले ही अध्ययन कर चुके है। की चालक का यदि आकर बढ़ा दे। तो उसकी धारिता बढ़ाई जा सकती है।
परन्तु संधारित्र के माध्यम से उसके आकार में बृद्धि किये बिना ही उसकी धारिता बढ़ा सकते है।

संधारित्र की परिभाषा

किसी चालक के आकार में परिवर्तन किये बिना ही उसपर आवेश की पर्याप्त मात्रा संचित करने की क्रिया को संधारित्र कहते है।

समान्तर प्लेट संधारित्र की धारिता 

माना की प्लेट x को +q आवेश कुलाँम दिया जाता है। प्रेरण द्वारा उसके सामने वाली प्लेट के भीतरीतल पर -q आवेश उत्पन्न होता है। इसका Y शिरा पृथ्वी से जुड़ा हुआ है।
                                                         विभव v=Ed

v का मान रखने पर 
समीकरण 1 को 2 से भाग देने पर 
प्लेटो के बीच निर्वात के स्थान पर परावैद्युत माध्यम होने पर संधारित्र की धारिता k गुना हो जाएगी।

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