आवेशित चालक तथा आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा

इस Article में हम आवेशित चालक तथा आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा के बारे में पढ़ेंगे। ये 12th Physics का काफी Important Derivation है। जिसके बारे में ज्ञान होना काफी आवश्यक है।

 

आवेशित चालक की स्थितिज ऊर्जा 

किसी चालक को आवेशित करने में जो कार्य करना पड़ता है। वो संपूर्ण स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित हो जाता है। इसे चालक की स्थितिज ऊर्जा कहते है।
W=आवेश X औसत चाल X विभव


उपयुक्त सूत्र से ज्ञात हुआ यदि q आवेश में v Volt में तथा C फैरड में हो तो, ऊर्जा जूल में प्राप्त होगी।

आवेशों के निकाय की स्थितिज ऊर्जा 

इसमें हम दो आवेशों के बारे में जानेगे। यहाँ दो आवेशों को अनंत से लाकर एक निकाय की रचना करके स्थितिज ऊर्जा ज्ञात करेंगे
माना दो आवेश qq2 , r दूरी पर स्थित है। इन दोनों आवेशों की स्थिति क्रमश: A व B है।
आवेश q1 को अनंत से बिंदु A तक लेन में किया गया कार्य
w1= ( A बिंदु का विभव  )x (q1)
A बिंदु का विभव शून्य है इसलिए w1 = 0

w1=0

आवेश q2 को अनंत से बिंदु B तक लेन में किया गया कार्य
W2= (B बिंदु का विभव) x (q2)
W2= ( kq/r1x q2)                                                                   आवेश q1 के कारण बिंदु b पर विभव kq1/r
W2= kq1q2/r
निकाय को बनाने में संपूर्ण पृष्ठ
यही कार्य निकाय की स्थितिज ऊर्जा के रूप में संचित होगा 

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